Category: अर्थ-व्यापार

राजीवनगर में पतंजलि मेगा स्‍टोर का हुआ शुभारंभ

पूर्व सभापति अवधेश नारायण सिंह व परिवहन मंत्री संतोष निराला ने दीप प्रज्‍ज्‍वलित कर किया उद्घाटन

पटना। राजधानी के राजीवनगर के रोड नंबर 12 के पास पतंजलि मेगा स्‍टोर का शुभारंभ आज विधान परिषद के पूर्व सभापति सह सदस्‍य अवधेश नारायण सिंह और परिवहन मंत्री संतोष कुमार निराला ने दीप प्रज्‍ज्‍वलित कर किया। यह उत्‍तर भारत का सबसे बड़ा पतं‍जलि मेगा स्‍टोर है। मेगा स्‍टोर के शुभारंभ के बाद पूर्व सभापति अवधेश नारायण सिंह ने कहा कि अब राजधानीवासियों को आसानी से पतंजलि के सभी उत्‍पाद एक जगह मिल जाएंगे। उन्‍होंने कहा कि पतंजलि के उत्‍पाद विश्‍वसनीयता के पर्याय हैं। परिवहन मंत्री संतोष कुमार निराला ने कहा कि बिहार में नये कारोबार का माहौल बन रहा है। इससे नये निवेशक बिहार में आ रहे हैं।
पतंजलि मेगा स्‍टोर के प्रोपराइटर डॉ प्रकाश चंद्र ने कहा कि अब एक ही छत के नीचे पतं‍जलि के 800 उत्‍पाद मिल सकेंगे। यह उत्‍तर भारत का सबसे बड़ा मेगा स्‍टोर है। उन्‍होंने कहा कि पतं‍जलि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया का सपना साकार कर रहा है। पतंजलि के सभी उत्‍पाद स्‍वदेशी हैं और इससे देश में रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं। पतंजलि आयुर्वेद को बढ़ावा दे रहा है। प्रकाश चंद्र ने कहा कि यह उत्‍तर भारत का सबसे बड़ा पतं‍जलि मेगा स्‍टोर है। शुभारंभ के मौके पर विधायक समीर कुमार महासेठ, पूर्व केंद्रीय मंत्री नागमणि, जदयू के प्रवक्‍ता राजीव रंजन, राधेश्‍याम सिंह, संजय सोम, इंदल सिंह, धनंजय शर्मा समेत बड़ी संख्‍या में युवा उद्यमी मौजूद थे।

राष्ट्र-निर्माण हेतु आत्मानुषासन और नैतिक मूल्यों का परिपालन आवष्यक-राज्यपाल

पटना, 26 जुलाई 2017
‘‘भारतीयों का जीवन उच्च आदर्शों को समर्पित, संयम और सादगी का जीवन रहा है। आज चारित्रिक गुणों का परिवर्द्धन आवष्यक है। आत्मानुषासन चरित्र-निर्माण की रीढ़ है। नैतिक मूल्यों और मर्यादा से ही सामाजिक बुराइयों पर अंकुश लग सकता है। स्वस्थ शरीर, स्वस्थ मन और स्वस्थ विचार -जीवन और जगत् को भयमुक्त बनाते हैं।’’ -उक्त विचार, महामहिम राज्यपाल-सह-कुलाधिपति श्री केषरी नाथ त्रिपाठी ने स्थानीय एस॰के॰ मेमोरियल हाॅल में आयोजित नालन्दा खुला विष्वविद्यालय के ‘ग्यारहवें दीक्षान्त समारोह’ को अध्यक्षीय पद से संबोधित करते हुए व्यक्त किये।
राज्यपाल श्री त्रिपाठी ने कहा कि बिहार में कई इतिहास-प्रसिद्ध और गौरवषाली विष्वविद्यालय स्थापित रहे हैं। नालन्दा एवं विक्रमशिला के प्राचीन विश्वविद्यालय इसी राज्य में पल्लवित एवं पुष्पित हुये। प्राचीन धर्म, दर्शन एवं साहित्य के क्षेत्र में भी इस राज्य ने विश्व को प्रभावित किया। विश्व का प्रथम एवं प्राचीनतम गणराज्य (वैशाली का लिच्छवी गणराज्य), इसी राज्य में स्थापित एवं विकसित हुआ। आधुनिक युग में भी गाँधीजी ने बिहार से ही अपनी कर्म-यात्रा का श्रीगणेश किया था। गाँधीजी के सत्याग्रह के प्रथम प्रयोग, जिसे हम ‘चम्पारण सत्याग्रह’ (1917) के नाम से जानते हैं का शताब्दी-वर्ष हम आयोजित कर रहे हैं। यह हमारे लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि भारत के प्रथम राष्ट्रपति डाॅ॰ राजेन्द्र प्रसाद एवं भारतीय संविधान-निर्मात्री-सभा के अन्तरिम अध्यक्ष डाॅ॰ सच्चिदानन्द सिन्हा की जन्मस्थली बिहार ही है। अतः निःसंदेह बिहार की मिट्टी में महापुरुषों को जन्म देने एवं उन्हें महानता के षिखर पर पहुँचाने की क्षमता रही है। आज पुनः हमें अपनी गौरवषाली विरासत का सादर स्मरण कर, वर्तमान को सजाते-सँवारते, नये स्वर्णिम भविष्य के निर्माण के लिये दृढ़संकल्पित और क्रियाषील हो जाने की जरूरत है।
राज्यपाल श्री त्रिपाठी ने, 33 वर्ष की अत्यन्त कम उम्र मंे ही कलकत्ता विष्वविद्यालय के कुलपति बने डाॅ॰ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के संबोधन के एक अंष को उद्धृत करते हुए कहा कि भारतीय विष्वविद्यालयों को राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के एक जीवन्त अंग के रूप में अपनी महत्ता को सदैव स्मरण रखना चाहिए। जीवन के आध्यात्मिक और भौतिक-दोनों उद्देष्यों की प्रतिपूर्ति की दिषा में इन्हें तत्पर रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि अपनी मातृभूमि की समृद्धि और मानव सभ्यता की उच्चतम परम्पराओं को वर्द्धमान बनाये रखने में विष्वविद्यालयों की अग्रणी भूमिका है।
राज्यपाल ने कहा कि ‘दीक्षान्त समारोह’ का प्रत्येक क्षण वस्तुतः अविस्मरणीय होता है। यह वास्तव में पढ़ाई का अन्त नहीं है, बल्कि यह जीवन की सुदीर्घ यात्रा का एक पड़ाव है। श्री त्रिपाठी ने नालन्दा विष्वविद्यालय की प्रषंसा करते हुए कहा कि समय पर परीक्षा, निर्धारित तिथि को परीक्षाफल सहित अनेक विशेषताएँ इसे देश के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों की श्रेणी में स्थापित करती हैं। सामाजिक दायित्वों के निर्वहन में भी यह विश्वविद्यालय सजग रहा है। राज्यपाल ने कहा कि उच्च षिक्षा को ग्रामीण स्तर तक पहुँचाने के उद्देष्य से इस विष्वविद्यालय द्वारा प्रखण्ड स्तरीय अध्ययन केन्द्र खोला जाना भी सराहनीय है। उन्होंने ‘दीक्षान्त समारोह’ में उपाधि ग्रहण करनेवाले सभी विद्यार्थियों को अपनी शुभकामनाएँ एवं बधाई दी।
कार्यक्रम में केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री श्री प्रकाष जावेडकर के वीडियो संदेष को भी प्रदर्षित किया गया, जिसमें उन्होंने कहा कि षिक्षा का मूल उद्देष्य अच्छे इंसान का निर्माण है। कार्यक्रम में दीक्षान्त-भाषण देते हुए बनारस हिन्दू विष्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डाॅ॰ लालजी सिंह ने कहा कि विष्वविद्यालयों को प्राप्त स्वायत्तता बहाल रहनी चाहिए। उन्होंने युवा शक्ति का राष्ट्रीय नव निर्माण में सदुपयोग करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में विष्वविद्यालय का प्रगति-प्रतिवेदन विष्वविद्यालय के कुलपति प्रो॰ रवीन्द्र कुमार सिन्हा ने प्रस्तुत किया, जबकि धन्यवाद-ज्ञापन कुलसचिव डाॅ॰ एस॰पी॰ सिन्हा द्वारा किया गया। कार्यक्रम में राज्यपाल ने विभिन्न विषयों में स्वर्ण पदक प्राप्त करनेवाले विद्यार्थियों को पदक एवं उपाधियाँ प्रदान की।

कौषल विकास केन्द्र के नाम पर हो रही जनता के गाढ़ी कमाई की लूट

पटना, 22 जुलाई, 2017
राष्ट्रीय सोनिया गांधी ब्रिगेड कांग्रेस के प्रदेष अध्यक्ष सौरव वर्मा ने बिहार के षिक्षा मंत्री सह बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष श्री अषोक चैधरी को बधाई देते हुए कहा कि जहां एक ओर केन्द्र सरकार षिक्षित युवाओं को बेराजगार बनाने और केन्द्र के अधीन विभिन्न विभागों में वैकेंसी न निकालने पर तुली है, वहीं महागठबंधन सरकार ने षिक्षा विभाग में नौकरियों का पिटारा खोल षिक्षित बेरोजगार युवाओं की सुध ली है। जिससे युवाओं व अन्य बेरोजगार लोगों में हर्ष का माहौल व्याप्त है और षिक्षा मंत्री के इस पहल को काबिलेतारिफ बताया है। श्री वर्मा कहा कि जहां राज्य सरकार जल्द ही 19864 षिक्षकों को बहाल करेगी, वहीं आदेषपाल और रात्रि प्रहरियों को भी बहाल करेगी। जिससे बेरोजगार षिक्षित युवाओं व अन्य लोगों में रोजगार के प्रति आषा की किरण जगी है।
श्री वर्मा ने केन्द्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि केन्द्र की मोदी सरकार पूरी तरह से युवा विरोधी है। यहीं वजह है कि जहां यूपीए शासनकाल में देष के युवा किसी न किसी प्रतिष्ठान-विभागों में कार्य कर अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे थे परंतु मोदी सरकार को उनका कमाना कतई शोभा नहीं दिया और नोटबंदी लागू का देष के लाखों युवाओं के हाथों से रोजगार छिनने में अहम भूमिका निभायी। हर साल लाखों युवाओं को नौकरी दिलाने का सब्जबाग दिखाकर युवाओं को ठगने वाली केन्द्र सरकार ने कौषल विकास योजना को जमीन पर उतारा लेकिन उक्त योजना का पूरे देष में क्या हश्र है, किसी से छिपी नहीं है। उक्त योजना सिर्फ कागजों पर ही दिखती है। अगर उक्त योजना की जांच किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी से कराया जाए तो दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा। रेवरियों के तरह गांव-प्रखंडों में बांटे गए कौषल विकास केन्द्र सिर्फ जनता के गाढ़ी कमाई को लूटने के लिए दिया गया है। उन्होंने कौषल विकास केन्द्रों की जांच की मांग करते हुए संचालकों पर कठोर कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि देष के नौजवानों का भविष्य गर्त में जाने से रोका जा सके।

किडजी प्ले स्कूल के प्रांगण में सावन महोत्सव का आयोजन

पटना : सावन महिना आते ही एक अलग हलचल पैदा हो जाती है पटनावासियों में. हर ओर सावन महोत्सव की धूम दिखाई देने लगती है. पटना, कंकड़बाग के चित्रगुप्तनगर में किडजी प्ले स्कूल के प्रांगण में सावन महोत्सव का आयोजन किया गया. सावन महोत्सव के उद्घाटन स्कूल के संस्थापीका आयुषी सिंह ने किया तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता आयुषी सिंह ने की. स्वागत में आयुषी सिंह ने कहा कि सावन का महीना हरियाली का प्रतीक होता है, सावन महीने में भगवान शंकर की पूजा कि जाती है. साथ ही इस पवित्र सावन महोत्सव के बारे में बच्चो के माताओं को को भी कई जानकारियां भी दी. कार्यक्रम का शुभारंभ स्कूल के बच्चो की माताओं के रैम्प वाक द्वारा किया गया. इस दौरान सभी माताएं हरी-हरी चूड़ीयाँ और हरी सारियों में सुसज्जित होकर पहुंची. रंग-बिरंगे फूलों और हरे-हरे गुब्बारों से स्कूल परिसर को सजाया गया था.

स्कूल के शिक्षिकाओं ने भी हरे परिधान धारण कर बच्चों के माताओं के साथ सावन-गीतों पर खूब धमाल मचायी. चीटियाँ कलाइयाँ बे …..तेरे और मेरे मिलने का सावन आया है………इन गानों पर माताओं ने खूब मस्ती कि. प्ले स्कुल में बच्चों कि माताओं द्वारा रैंप वाक, मेहँदी प्रतियोगिता, आईक्यू टेस्ट, सावन क्वीन, स्टार मौम और सवाल-जबाब प्रतियोगिताएं भी हुए. इस प्रतियोगिता में सावन क्वीन – श्रीमती पूजा रंजन, स्टार माँ – श्रीमती नीलम, श्रीमती केसीएन – श्रीमती काजल, विशेष पुरस्कार – श्रीमती उषा, श्रीमती प्रिया, श्रीमती श्वेता, श्रीमती बिनिता दिया गया. प्रिंसिपल और चीफ गेस्ट – श्रीमती आयुषी सिंह थी. कार्यक्रम के अतिथियों का स्वागत श्रीमती मंजू सिंह ने की.
किडजी प्ले स्कुल के संयोजिका आयुषी सिंह ने कहा कि बच्चो की माताएं सावन के रंग में पूरी तरह रंग गयी हैं और ऐसे कार्यक्रमों से बच्चों में मानसिक विकास भी होती है. पढ़ाई के साथ-साथ ऐसे कार्यक्रम का आयोजन भी जरूरी होता है.

सामाजिक एवं आर्थिक आधार पर बिहार में गरीबी राष्ट्रीय औसत से अधिकतम- डा॰ जगन्नाथ मिश्र

पटना, 11 जुलाई, 2017
देश में व्याप्त गरीबी, पिछड़ापन, स्वास्थ्य, आवास, रोजगार सम्बन्धी जो आंकड़े प्रस्तुत किये गये हैं और जो मापदण्ड अपनाये गये हैं, उसके आधार पर बिहार की गरीबी एवं गरीबों की संख्या बिहार की पिछले 25 वर्षों की सामाजिक न्याय की सरकार की उपलब्धियों का पोल खोल दिया है। सभी मापदण्डों के अंतर्गत बिहार की गरीबी, पिछड़ापन, अधिकतम वहीं स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार तथा आवास राष्ट्रीय औसत तथा अन्य राज्यों की तुलना में इस सर्वेक्षण के मुताबिक सबसे निचले पायदान पर बिहार प्रदर्शित हो रहा है। राज्य सरकार ने स्थानीय उद्यमियों को 1990 से 2005 तक और फिर 2005 से 2014 तक मदद नही दी है। यह बड़ा ही विस्मयकारी रहा है कि देश के बड़े-बड़े काॅर्पोरेट क्षेत्र के बड़े-बड़ें उद्योगपतियों द्वारा बिहार में पूँजी निवेश के लिए आश्वासन देने के बावजूद उद्योगपतियों ने पूँजी निवेश नही किया। लघु उद्योग इकाइयों के राज्यस्तरीय अध्ययन के अनुसार, बिहार की 70 प्रतिशत लधु उद्योग इकाइयाँ रूग्न अथवा बंद हैं। बिजली संकट दूर करने की कार्य योजना बनाने का निर्णय लिया गया था जिसमें सफल सुधार संभव नहीं हो पाया है। राज्य सरकार लघु, छोटे और मझौले क्षेत्र के उद्यमियों की नई पीढ़ी तैयार करने में अब तक विफल रही है। सामाजिक स्थिति या जातिवादी विचारधाराओं के कारण भी लोगों को अवसर नहीं मिल पाते। अनुसूचित जातियों के बीच गरीबी तो उच्च वर्ग की अपेक्षा तीन गुणा अधिक है। पिछले 25 वर्षों में दलित अंगीभूत योजना पर कुल योजना उद्व्यय का 15 प्रतिशत व्यय के विरूद्ध केवल 1.2 प्रतिशत ही व्यय हुआ है। इसी तरह की स्थिति मुसलमान और पिछड़ा वर्ग के बीच फैली है। बिहार में धनविनिवेष का स्तर गिरते जाने से विकास सम्बंधी उपलब्धि कम हुई है। राज्य में गैर-सरकारी स्तर का धन-विनिवेष अन्य राज्यों की अपेक्षा बहुत ही कम हुआ है।
डा॰ मिश्र ने पत्र में कहा है कि बिहार में विभिन्न प्रकार का सामाजिक वर्गभेद बड़े पैमाने पर है और वह कई दषकों से लगातार चलता आ रहा है। षिक्षा क्षेत्र में नामांकन और साक्षरता की दरें देष के औसत से बहुत कम है जिससे पता चलता है कि पुरुष-स्त्री में और समाज के विभिन्न वर्गों में कितना बड़ा अन्तर है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी कई ऐसे उदाहरण हैं जिनमें बिहार सबसे पिछड़ा हुआ है। स्वच्छ पेयजल के मामले में बिहार की स्थिति अच्छी नहीं है। षिक्षा के क्षेत्र में सबसे बड़ी कमजोरी यह रही है कि षिक्षा-संस्थाओं में षिक्षक रहते ही नहीं। प्रषासनिक कमजोरियों ने इस समस्या को अधिक उलझा दिया है। स्वास्थ्य-सेवा क्षेत्र का हाल भी कुछ ऐसा ही है। सरकार की ओर से मिलनेवाला आर्थिक साहाय्य गरीबों तक नहीं पहुँच पाता। बिहार में इसके मुख्य कारण चार हैं। पहला यह कि सरकार जो भी धनराषि खर्च करती है उसका लाभ गरीबों को न तो षिक्षा के क्षेत्र में और न स्वास्थ्य के क्षेत्र में, भले ही बजट में उसका प्रावधान क्यों न किया गया हो। दूसरा यह कि जो भी धन खर्च किया जाता है वह भ्रष्टाचार और व्यवस्था की कमजोरी के कारण जरूरत मंदों को नहीं मिल पाता है। तीसरी बात यह कि जो लोग ऐसी सेवा प्रदान करने के लिए जिम्मेवार हैं उन्हें मौजूद रहकर देखना चाहिए कि गरीबों को ऐसी सेवा उपलब्ध हो रही है। चैथा कारण यह है कि षिक्षा और स्वास्थ्य के मामलों में जनता को सरकार पर भरोसा ही नहीं रह गया है। बिहार में अनेक गरीबी निवारण करनेवाली योजनाएँ चलायी जा रही हैं जिसका उद्देष्य है कि उनसे गरीबों तथा समाज के कमजोर वर्ग के लोगों की जीविका मिले और उनकी दषा में सुधार हो किन्तु जिन लोगों को यह लाभ पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है उनसे भिन्न लोगों के बीच धन का इस्तेमाल होता है। यह एक गंभीर समस्या है। बिहार में राजनीतिक हस्तक्षेप अधिक होता है और अधिकारी वर्ग की क्षमता भी कुषल नहीं है। इनके अलावा कुछ अन्य कठिनाइयाँ हैं कि बिहार का षासन बहुत केन्द्रीयकृत है जिसके चलते निर्णय लेने और परियोजनाओं के कार्यान्वयन में बाधा पड़ती हैं

धान फसल में बीजोपचार क्यों और कैसे करे

पटना, 04 जुलाई 2017:- कृषि विभाग ने जानकारी दी है कि खरीफ मौसम में धान की खेती का कार्य कृषक प्रारंभ कर चुके है और बड़ी तेजी से बीज स्थली में बीज गिराने का कार्य किया जा रहा है। इस संदर्भ में ध्यातव्य है कि कृषक इस समय खरीफ से संबंधित अपनी तैयारियों में निम्नाकित बिन्दुओ पर अवष्य ध्यान दें अच्छा उत्पादन के लिए खेत के अनुसार प्रभेद का चुनाव करें ताकि उत्पादन सुनिष्चित हो सके, खेत की ऊँची, नीची और मध्यम स्थिति के अनुसार उस क्षेत्र में लगने वाले कीट/व्याधियों के मद्देनजर धान के उत्पाद एवं प्रतिरोधी प्रभेदों का चयन करें, बीज स्वच्छ, स्वस्थ एवं पुष्ट होना चाहिए जिसमें खरपात के बीज मिले हुए न हों। बीज को फटक कर साफ सुथरा एवं खरपात को बीज से रहित कर लिया जाना चाहिए। बीज की अंकुरण क्षमता 80 प्रतिषत से कम नहीं होनी चाहिए। इसकी जाँच के लिए सौ (100) बीज को अंकुरण के लिए गमला या मिट्टी में डाल देना चाहिए। जितने पौधे उग जाते है, वही बीज की अंकुरण क्षमता होती हैं इसलिए किसान पुष्ट बीज का ही प्रयोग करें। पुष्ट बीज प्राप्त करने के लिए साधरण नमक के 10 प्रतिषत घोल में बीज को डुबाएंे, तैर रहे हल्के बीज को अलग कर दंे और डूबे बीज को दो-तीन बार सादा साफ पानी से धोकर छाया में सुखा लें। बीजोपचार क्योें- बीज में अंदर एवं बाहर रोगों के रोगाणु सुषुप्त अवस्था में (बीज जनित रोग) मिट्टी में (मिट्टी जनित रोग) एवं हवा में (वायु जनित रोग) मौजूद रहतें हैं। ये अनुकूल वातावरण के मिलने पर अंकुरित होकर पौधों पर रोग के लक्षण के रूप प्रकट होते हंै।
बीजोपचार कैसे- कीट/व्याधि से मुक्त फसल के बीज को स्वस्थ बीज माना जाता है, जोे कि व्यवहार में संभव नहीं है इसलिए किसी भी बीज को मिट्टी में गिराने से पहले अनुषंसित बीजरोधक से बीजोपचार करने की सलाह दी जाती है। उपचारित बीज को स्वस्थ माना जाता है। धान के बीच को कार्बेन्डाजिम 50 प्रतिषत धु0चू0 या कार्बेडाजिम 12 प्रतिषत़ मैनकोजेब 63 प्रतिषत धु0चू0 का 2 ग्राम प्रति किलो बीज एवं स्टेªप्टोसायक्लिन का 1 ग्राम प्रति 10 किलो की दर से बीज में मिलाये।
बीज उपचार की विधियाँ- सीडड्रम में बीज डालकर उसमें बीजोपचार के लिए अनुषंसित शोधक की मात्रा एवं पानी का छींटा देकर उसमें लगे हैंडल के सहारे ड्रम को इतना घुमाया जाता है कि बीज के उपर एक परत चढ़ जाये। आवष्यकतानुसार बीज में पानी के छींटे दिये जा सकते हंै।घड़ा विधि- घड़ा में थोड़ा बीज एवं उसी अनुपात में शोधक डालते हैं फिर उसी प्रकार थोड़ा-थोड़ा करके घड़े को दो तिहाई भाग भर देते हंै। पानी का छींटा दे कर घड़े के मुँह को बंद कर इतना हिलाते हैं कि बीज और शोधक अच्छी तरह से मिल जाएँ,
स्लरी विधि- इस विधि में षोधक की अनुषंसित मात्रा का गाढ़ा घोल बनाकर बीज के ढेर पर देकर उसे दस्ताना पहने हाथांे से अच्छी तरह मिला देते हंै।
घोल विधि- इस विधि में षोधक की अनुषंसित मात्रा का घोल पानी की निर्धारित मात्रा में बनाकर उसमें बीज को नियत समय तक डुबाकर रखा जाता है। धान के बीच को उपचारित करने के लिए बीज को पानी में भिगोकर बाहर निकाल लें, उसके बाद उसमें निर्धारित मात्रा में बीजषोधक मिला दें। अब इस शोधित बीज को जूट के बोरे से कम से कम 24 घंटे तक ढँक कर रखें, ताकि बीज में अंकुरण (ैचतवनजपदह)नजर आने लगे। इसके बाद उसे तैयार खेत में बिखेर दें। ऐसा करने से कम से कम एक सप्ताह पहले स्वस्थ बिचड़ा तैयार हो जाता है। पौधा संरक्षण केन्द्रांे पर सीडड्रम (बीज उपचारक-यंत्र) नाममात्र शुल्क पर उपलब्ध है। जिसकी सेवा प्राप्त की जा सकती है। किसान भाइयों एवं बहनों से निवेदन है कि जानकारी एवं सुविधा के लिए नजदीक के पौधा संरक्षण केंन्द्र सहायक निदेषक, पौधा संरक्षण अथवा जिला कृषि पदाधिकारी के कार्यालय एवं कृषि विज्ञान केन्द्र केन्द्र के वैज्ञानिकों से संपर्क करें।

बिहार प्रदेश कांग्रेस ने केन्द्र से अपील किया है कि जी0एस0टी0 में कृषि उपकरणों पर लग रहे टैक्स का ध्यान रखे

पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता पूर्व विधायक डा0 हरखू झा ने कहा है कि कृषि उपकरण के सम्बन्ध में जो जी0एस0टी0 अभी निर्धारित किया गया है वह किसानों के अनुकूल नहीं है।डा0 झा ने कहा है कि अभी निर्धारित दर 12 प्रतिशत से 28 प्रतिशत तक तीन आइटम पर रखा गया है इससे किसानों को खेती करने में काफी लागत आयेगी जिससे भविष्य में किसानों को लागत मूल्य के हिसाब से फसलों का दाम नहीं मिलेगा।
डा0 झा ने कहा है कि खेती में पहले से भी लागत मूल्य बढ़ रहा है और अभी की वत्र्तमान सरकार उस हिसाब से किसानों को एम0एस0पी0 नहीं दे पा रही है यदि वत्र्तमान में यही जी0एस0टी0 दर लागू होता है तो किसानों के समक्ष बड़ी समस्या उत्पन्न हो जायेगी और इसका परिणाम होगा कि किसान खेती छोड़ने पर मजबूर हो जायगें। डा0 झा ने सुझाव दिया है कि जिस तरह से उत्पादन पर जी0एस0टी0 माफ किया गया है उसी तरह कृषि उपकरणों पर भी कम दर यानी 3 प्रतिशत से 5 प्रतिशत के बीच जी0एस0टी0 दर होना चाहिए।

षिक्षा मंत्री ने श्रुति एवं आषुतोष मेहरोत्रा द्वारा तैयार किये गये नये वेबसाईट को किया लोकार्पित

पटना, 13 जून 2017:ः- राज्य के षिक्षा तथा विज्ञान एवं प्रावैधिकी मंत्री डाॅ॰ अषोक चैधरी ने आज विकास भवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष में पटना के दो युवाओं श्रुति मेहरोत्रा एवं आषुतोष मेहरोत्रा द्वारा तैयार की गई एक नई वेबसाईट को लोकार्पित किया। ‘‘सिवतमदबमपदकपंण्पद’’ नामक यह वेबसाईट युवाओं और खासकर अध्ययनरत युवाओं के लिए विषेष उपयोगी है। इस वेबसाईट के जरिये युवा अपनी कतिपय तात्कालिक समस्याओं के समाधान की दिषा में आवष्यक सुझाव प्राप्त कर सकते हैं।
षिक्षा मंत्री डाॅ॰ अषोक चैधरी ने वेबसाईट तैयार करने वाले श्रुति और आषुतोष को बधाई देते हुए कहा कि ऐसी पहल से युवाओं को एक स्वस्थ दिषा और दृष्टि हासिल करने में काफी सहूलियत हो जायेगी।
वेबसाईट तैयार करनेवाले युवा श्रुति और आषुतोष मेहरोत्रा ने बताया कि आज जिन्दगी की भाग-दौड़ और कषमकष में युवा शीघ्र ही घबरा जाते हैं और अवसाद ग्रस्त हो जाते हैं। इस वेबसाईट के जरिये वे अपनी हताषा से मुक्ति पायेंगे और उनमें जीवन के प्रति अपने लक्ष्य को हासिल करने की दिषा में एक सार्थक नजरिया विकसित होगा। उन्होंने कहा कि इस वेबसाईट के माध्यम से युवा अपने भय और असुरक्षा की भावना से मुक्ति पाने हेतु निःषुल्क रूप से आवष्यक परामर्ष प्राप्त कर सकेंगे। इस वेबसाईट का समन्वयन डाॅ॰ संजय ने किया है। इस अवसर पर षिक्षाविद् एवं साहित्यकार श्रीमती ममता मेहरोत्रा भी उपस्थित थीं।

पटना के एलिट इंस्टिच्यूट के 172 छात्रों ने जेईई-मेन में सफलता का परचम लहराया

जेईई मेन 2017 में पटना के एलिट इंस्टिच्यूट के 172 छात्रों ने सफलता हासिल की है.संस्थान के निदेशक अमरदीप झा गौतम ने इस शानदार सफलता पर छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि सही दिशानिर्देशऔर कड़ी मेहनत के कारण छात्रों ने सफलता हासिल कर इंस्टिच्युट का नाम रौशन किया है.

पिछले वर्ष इंस्टिच्यूट के जेईई मेन परीक्षा में 162 छात्रों ने क्वालिफाई किया था.

गुरुवार को रिजल्ट जारी होने के बाद संस्थान में खुशी की लहर दौड गयी.
अमरदीप झा गौतम ने बच्चों की कामयाबी का श्रेय उनकी कड़ी मेहनत, अभिभावकों द्वारा बच्चों को प्रोत्साहन, संस्थानके शिक्षकों के सहयोग और संस्थान के सही मार्गदर्शन को दिया.

श्री गौतम ने सफल छात्रों का मुंह मीठा करते हुए उनके सफल करियर की शुभकामना दी. उन्होंने बताया कि 172 सफलछात्र-छात्राओं में सामान्य वर्ग के 43, ओबीसी के 96 और एससी/एसटी वर्ग से 33 छात्र शामिल हैं. इन सफल छात्र-छात्राओं में अनुष्का राज, अमित कुमार, हर्ष गौरव और प्रीतिका की सफलता विशेष तौर पर उल्लेखनीय है.

राज्य स्तरीय ‘लघु एवं मध्यम व्यापार / व्यापारियों के लिए डिजिटल भुगतान पहल’ पर कार्यशाला

29.05.2017
बिहार में डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रोधौगिकी मंत्रालय भारत सरकार के राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रोधौगिकी संस्थान के पटना सेंटर के तत्वाधान में राज्य स्तरीय ‘लघु एवं मध्यम व्यापार / व्यापारियों के लिए डिजिटल भुगतान पहल’ पर एक कार्यशाला का आयोजन पटना के अधिवेशन भवन में किया गया. इस दौरान विशेषज्ञों ने भारत सरकार की कैश लेस इकॉनमी की बढ़ते कदम की दिशा में लोगों के बीच डिजिटल ट्रांजेक्शन के गुड़ सिखाये. इससे पहले बतौर मुख्य अतिथि श्री रामलाल खेतान (अध्यक्ष बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन), श्री अरुण कुमार (सदस्य, इंडियन चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स), श्रीमति संध्या सिन्हा (सूर्या मोहिनी चैरिटेबल ट्रस्ट), श्री आनंद सिंह (सचिव, बिहार राज्य राइस मिल एसोसिएशन) और श्री मनोज कुमार (सदस्य, बिहार राज्य राइस मिल एसोसिएशन ने कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत दीप प्रज्ज्वलित कर की.

यह कार्यशाला सभी लोगों के लिए आयोजित था. कार्यक्रम से बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत किया और डिजिटल ट्रांजेक्शन के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की. कार्यशाला के अंत में प्रभारी निदेशक पटना सेंटर, श्री आलोक त्रिपाठी ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि बदलते भारत में डिजिटल पेमेंट सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है. उन्होंने डिजिटल पेमेंट के फायदे पर चर्चा करते हुआ कहा की डिजिटल लेन देन से देश में पारदर्शिता बनी रहती है. श्री त्रिपाठी ने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी, वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली जी और इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रोधौगिकी मंत्री श्री रवि शंकर प्रसाद जी ने देश हित में डिजिटल पेमेंट का सपना देखा, ताकि भ्रष्टाचार पर अंकुश लग सके और लोगों के लिए भी सुविधाजनक हो.