जीएसटी आजादी के 70 सालों में सबसे बड़े टैक्स सुधार – डा॰ जगन्नाथ मिश्र

पटना, 03 जुलाई, 2017
पं॰ जवाहर लाल नेहरू की तरह ही मौजूदा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ठीक उसी समय और स्थान को एक देश एक कर के लिए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू किया और 1 जूलाई से पूरा देश एक समान कर के धागे से गूंथ गया। प्रधानमंत्री श्री मोदी की मंशा थी कि तमाम गणमान्यों की गरिमामय उपस्थिति में जीएसटी की घोषणा के जरिये देश और दुनिया को यह संदेश दिया जाय कि भारत करों के जंजाल से आजाद हो गया है। इसका यह मतलब होगा कि भारत आर्थिक सुधारों के लिये प्रतिबद्ध है। सतत् और ऊँचे विकास के 70 साल पहले तय किये गये अपने लक्ष्य के प्रति वचनबद्ध है, जिसकी पं॰ नेहरू की जुबान में भारत ने बार-बार दोहराया था, जीएसटी उसी दिशा में एक महती कोशिश है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले साल 8 नवम्बर को नोट बंदी के बाद जीएसटी श्री मोदी सरकार का दूसरा बड़ा साहसिक फैसला है, जो लम्बे समय में आम आदमी और कारोबारियों को राहत देगा। आम आदमी तमाम उत्पादों पर अब तक 30 से 35 प्रतिशत तक टैक्स भरता है, जो अब घटकर 17 से 18 प्रतिशत तक रह जाएगा। चूंगी, आॅक्टराॅय टैक्स, बिक्री कर, उत्पाद शुल्क जैसे तमाम करों का जंजाल खत्म होने से इंस्पेक्टर राज और लाइसेंस राज की समस्या दूर होगी। जीएसटी से सैकड़ों कर कानूनों, जटिल प्रक्रियाओं और इंस्पेक्टर राज का अंत होगा, कारोबार में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। इससे पंजीकरण, रिटर्न, रिफण्ड और टैक्स भुगतान जैसी सभी प्रक्रियाओं का रिकाॅर्ड आॅनलाइन रहेगा। दुनिया के बहुत सारे देशों में जीएसटी लागू है। भारत में भी इसके लागू होने से उद्योग जगत और उपभोक्ता को फायदा पहुचेगा। जीडीपी और विकास दर बढ़ने से सरकार की कमाई बढ़ेगी और रोजगार भी बढ़ेंगे। अभिषेक जैन ने कहा कि जीएसटी का मेक-इन-इण्डिया पर भी सकारात्मक असर दिखेगा। वहीं पहले की तरह निर्यात में कोई शुल्क नहीं लगेगा और माल तैयार करने के दौरान दिये गये टैक्स की वापसी भी हो सकेगी। जीएसटी लागू होने के बाद भी महंगाई काबू में ही रहेगी। दरअसल, सिर्फ 19 फीसदी वस्तुओं पर ही टैक्स बढ़ेगा। अनाजों, रोजमर्रा की वस्तुओं और जरूरी सेवाओं को कर मुक्त या बेहद कम दरों के कोटे में रखा गया है। ज्यादातर सेवाएं उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से बाहर हैं। ऐसे में जीएसटी का असर खुदरा मूल्यों पर दिखने की संभावना कम है। जीएसटी से कारोबार बढ़ने के साथ सरकार का राजस्व भी बढ़ेगा। अभी देश की जीडीपी में करों का हिस्सा महज 16 प्रतिशत है, जो दूसरे देशों के मुकाबले काफी कम है। इसका सबसे बड़ा असर यह होगा कि यह देश की संप्रभूत्व राष्ट्र वाली छवि मजबूत करेगा हमारे विविध और व्यापक राष्ट्रको जोड़ने का काम करेगा। यह एक ऐतिहासिक बदलाव है। केन्द्र और राज्य सरकारों को कर वसूली में वृद्धि होगी। इससे आर्थिक एकीकरण को मजबूती मिलेगी जिससे भौतिक और सामाजिक इंफास्ट्रक्चर बनाने में अधिक धन खर्च किया जा सकेगा, जैसे सिंचाई और जल संरक्षण योजनाएँ।
डा॰ मिश्र ने कहा कि वास्तव में आजादी के बाद यह अब तक का सबसे बड़ा कर सुधार है। इसके लागू करने के आरंभ में समस्याएं आएंगी। कुछ परेशानियाँ भी होंगी। किंतु अंतिम रूप में यह सबके हित में है। इसलिए इसका विरोध करने की जगह इसमें सहयोग करना चाहिए।

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