देश की आजादी अगस्त क्रान्ति द्वारा बनायी गयी पृष्ठभूमि के कारण प्राप्त हुई- डा॰ जगन्नाथ मिश्र

पटना, 9 अगस्त, 2017
75वें अगस्त क्रान्ति दिवस के अवसर पर प्रतिष्ठान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, डा॰ जगन्नाथ मिश्र, पूर्व मुख्यमंत्री (बिहार) एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि भारत को आजादी एक लम्बे संघर्ष के बाद प्राप्त हुई। भारत के सफल स्वातंत्र्य संग्राम के इतिहास में अगस्त क्रांति (भारत छोड़ो आंदोलन) अत्यधिक महत्वपूर्ण एवं प्रेरणा प्रद रहा है। चाहे धार्मिक राजनीति हो अथवा विशुद्ध संवैधानिक उग्र क्रांतिकारी विस्फोट हो या फिर गाँघी जी के अनुप्रेरक नेतृत्व में सत्याग्रह, इस सभी में गांधी जी की महत्वपूर्ण देन रही है। सरकारी प्रलेखों, पत्रों, अप्रकाशित अभिलेखों तथा निजी पत्राचारों सहित सभी उपलब्ध सूत्रों पर आधारित होने के फलस्वरूप यह सर्वथा प्रामाणिक भी है, किन्तु उन्होंने जो किया उसका सर्वाधिक महत्व है। यह आंदोलन हमारे स्वतंत्रता संग्राम का, जिसका गाँधी जी के नेतृत्व में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस प्रमुख उपकरण बन गया। विभिन्न चरणों में देश की जनता ने उपयुक्त हिस्सा लिया। गाँधी जी कहा था कि वे ऐसे भारत के निर्माण के लिए कोशिश करते रहंेंगे, जिसमें गरीब से गरीब आदमी भी यह महसूस करे कि यह उसका देश है जिसके निर्माण में उसके आवाज का महत्त्व है। वे ऐसे भारत के लिए कोशिश करते रहे, जिसमें ऊँंच-नीच का कोई भेद न हो। सभी जातियाँ मिल-जुलकर रहे। उनके भारत में, अस्पृष्यता व शराब तथा नशीली चीजों के अनिष्टों के लिए कोई स्थान न हो। उसमें स्त्रियों को पुरूषों के समान अधिकार मिलेे। सारी दुनिया ंसे भारत का संबंध शांति और भाईचारे का रहे। यह है उनके सपनों का भारत। गाँधी जी के अनुसार आर्थिक न्याय के अभाव में सामाजिक न्याय कल्पना मात्र है। उनके अनुसार आर्थिक न्याय का अभिप्राय है कि धन-सम्पदा के आधार पर व्यक्ति-व्यक्ति के बीच विच्छेद की कोई दीवार खड़ी नहीं की जाए। एक मनुष्य को दूसरे मनुष्य का अथवा एक वर्ग को दूसरे वर्ग का शोषण करने का अधिकार नहीं है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नेतृत्व में असहयोग आन्दोलन, विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार, दाण्डी मार्च, नमक सत्याग्रह, भारत छोड़ो आन्दोलन तथा सम्पूर्ण स्वाधीनता के लिए ‘करो या मरो’ आदि अभियान समय-समय पर चलाये गये। असंख्य ज्ञात एवं अज्ञात वीर क्रान्तिकारियों तथा महान् स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने तन-मन-धन से स्वाधीनता आन्दोलन में सक्रिय योगदान किया और अपने प्राणों तक की आहुति देने में भी गर्व का अनुभव किया। यह हमारे देश के वीर क्रान्तिकारियों के ही संघर्ष का प्रतिफल है कि हमें आजादी मिली।
डा॰ मिश्र ने कहा कि सन् 1942 के भारत छोड़ो आन्दोलन का अपना अलग ही गौरवशाली महत्व है। इस आन्दोलन से यह स्पष्ट हो गयी थी कि लोगों में आजादी को लेकर असंतोष नई ऊँचाई तक पहुँच गयी थी लोगों को असंतोष को समझते हुए और गतिरोध तोड़ने के लिए गाँधी जी तत्काल स्वराज चाहते थे। उन्होने दावा किया किया था कि ब्रिटिश शासन अपनी वैद्यता खो चुकी है। गौरतलब है कि गाँधी जी ने भारत की आजादी के संघर्ष में आजादी को अहिंसा से परिभाषित किया। अहिंसा उनके आंदोलन का सर्वोत्तम हथियार रही। अंग्रेजों को इतने विद्रोह की उम्मीद नहीं थी। शूरू में उनका प्रयास इसके प्रभावों को कम करने की थी। उन्हें स्वीकार करना पड़ा कि 1857 के बाद भारत छोड़ो आंदोलन अब तक का सबसे बड़ा विद्रोह था। उसमें यह प्रदर्शित हुआ कि भारतीयों को साहस, शौर्य, प्रशिक्षित लड़ाकों और आपसी समन्वय के साथ काम करने की क्षमता है। अगस्त क्रांति भारत को आजाद तो नहीं करा सका लेकिन यह स्वतंत्रता संग्राम को आगे बढ़ाने में मील का पत्थर साबित हुआ। लोग आजादी पाने के लिए बेचैन थे। भारत छोड़ो आंदोलन ने अंग्रेजों को एहसास करा दिया कि भारत पर अब लंबे समय तक राज नहीं किया जा सकता इस आंदालन ने ही पूरे राष्ट्र को दिशा दी।

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