डॉ. श्री कृष्ण सिंह राजनीतिक चेतना फ्रंट के प्रमुख नेताओं एवं कार्यकर्ताओं की बैठक

डॉ. श्री कृष्ण सिंह राजनीतिक चेतना फ्रंट के प्रमुख नेताओं एवं कार्यकर्ताओं की एक बैठक फ्रंट के संस्थापक प्रोफ़ेसर रामजतन सिन्हा के आवास पर संपन्न हुई। बैठक का आयोजन आजादी की लड़ाई और देश के नवनिर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला समूह, ऊंची जातियां एवं मुसलमानों की वर्तमान परिस्थिति में राजनीतिक भूमिका और हिस्सेदारी के सवाल पर विचार-विमर्श के लिए आहूत की गई थी। इस बैठक में राज्य के वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति, राजद-जदयू सरकार के पतन तथा जदयू-भाजपा सरकार के गठन से उपजे हालात पर भी विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में राज्य के प्रमुख सामाजिक एवं बुद्धिजीवि नेता सहित फ्रंट के जहानाबाद, गया, नवादा, औरंगाबाद, अरवल, नालंदा, शेखपुरा, जमुई, लखीसराय, मुजफ्फरपुर, मोतिहारी, सीतामढ़ी, हाजीपुर, छपरा, सिवान, आरा, बक्सर, कैमूर, आदि जिलों के नेताओं ने भारी संख्या में भाग लिया। बैठक में उम्मीद एवं आमंत्रित सदस्यों के अनुपात में भारी संख्या में लोगों ने शिरकत की। बैठक में लोगों में भारी उत्साह देखा गया। बैठक की अध्यक्षता पूर्व मंत्री, बिहार सरकार, श्री नवल किशोर शाही ने की।
बैठक के आरंभ में ही प्रो. रामजतन सिन्हा ने बैठक के उद्देश्य और विषय वस्तु पर प्रकाश डालते हुए विगत 25 वर्षों के राजनीतिक पृष्ठभूमि के संदर्भ में डॉ. श्री कृष्ण सिंह राजनैतिक चेतना फ्रंट की आवश्यकता, महत्व एवं भूमिका पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डाला। प्रो सिन्हा ने प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि 1990 से 2005 के बीच में श्री लालू प्रसाद के नेतृत्व में सत्ता संरक्षित अपराधी गिरोह द्वारा समाज के विभिन्न वर्गों पर बेपनाह जुर्म ढाए गए।
समाज का ऐसा शायद ही कोई वर्ग, जाति और प्रमुख सामाजिक राजनीतिक नेता हो जिसे श्री लालू प्रसाद ने सत्ता के अहंकार में चूर होकर अपमानित और प्रताड़ित करने का काम नहीं किया हो। प्रो. सिन्हा ने कहा कि जब सरकार और उनके संरक्षण में पल रहा अपराधी एवं उग्रवादी गिरोहों का आतंक सारी हदें पार कर दी तब भूमिहार समाज ने खून और जान की बाजी लगाकर आतंक राज को समाप्त करने का बीड़ा उठाया। फलस्वरूप श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में जदयू-भाजपा की सरकार का गठन हुआ जिसमें कानून राज की स्थापना और लोगों को न्याय दिलाने का भरोसा दिया गया और बहुत हद तक लोगों ने राहत की सांस ली और प्रथम पाली में 2005 से 10 के बीच विकास की गति भी तेज हुई लेकिन दूसरी पारी में दलित, महादलित, पिछड़ा, अति पिछड़ा, पंचायत आरक्षण जैसे मुद्दों को लेकर यह सरकार भी लालू के रास्ते चल पड़ी। फलस्वरूप 2014 के संसदीय चुनाव में श्री नीतीश कुमार को मुंह की खानी पड़ी और अपमानजनक पराजय झेल मात्र 2 सीट पर सिमटना पड़ा। इसी हताशा में श्री नीतिश कुमार को 2015 के चुनाव में भी लालू प्रसाद और कांग्रेस के साथ चुनाव में जाना पड़ा जिसके वह सदा से सख्त विरोधी रहे। 2015 में महा गठबंधन की सरकार बनी। नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने पर विभिन्न कारणों से 20 माह के अंदर उन्हें पुनः मुख्यमंत्री बनने के लिए भाजपा से गठजोड़ करना पड़ा। प्रो. सिन्हा ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि इन बदलती हुई परिस्थितियों और सत्ता के बीच एक प्रश्न अनुत्तरित रहा। वह था आजादी की लड़ाई में संघर्ष और बलिदान करने तथा आजादी के बाद शिक्षा, स्वास्थ्य के विकास के लिए जमीन, भवन दान देकर स्कूल-कॉलेज, अस्पताल का निर्माण कराने वाले ऊंची जातियों और मुसलमान विशेषकर भूमिहारों का राजनीति की निर्णायक भूमिका में भागीदारी। प्रो. सिन्हा ने कहा कि हम भाजपा-जदयू के वर्तमान सरकार के विरोधी नहीं है बल्कि ऊंची जातियां मुसलमान और विशेषकर भूमिहारों के राजनीति के निर्णय की प्रक्रिया में तथा राजनीतिक भागीदारी में हिस्सेदारी के हिमायती हैं। भाजपा-जदयू गठबंधन को यह नहीं भूलना चाहिए कि सरकार के विश्वास प्रस्ताव पर नेता प्रतिपक्ष श्री तेजस्वी प्रसाद यादव के अभिभाषण को जहां लोगों ने बड़े पैमाने पर सराहा है, उन तमाम लोगों ने लालू प्रसाद के सत्ता से विदाई पर खुशी भी जताई है और राहत की सांस ली है। श्री तेजस्वी प्रसाद को इस बात को समझना चाहिए कि उनके पिता श्री लालू प्रसाद का विरोध भ्रष्टाचार से ज्यादा लालू प्रसाद द्वारा श्री जॉर्ज फर्नांडिस, शरद यादव, आई के गुजराल, एच डी देवेगौड़ा, कर्पूरी ठाकुर, रघुनाथ झा, रामविलास पासवान, नीतीश कुमार, हुकुमदेव नारायण यादव, राधा कृष्ण यादव एवं सुशील मोदी सहित तमाम नेताओं को अपमानित करने को लेकर था। बिहार में शायद ही कोई दल, राजनेता या समाज का प्रतिष्ठित व्यक्ति या पदाधिकारी हो जिसे लालू प्रसाद ने अपमानित नहीं किया हो। उसी तरह जनता दल यू और भाजपा गठबंधन को इस बात को समझना होगा कि आज समाज के जिन व्यापक वर्गों का विशेष कर ऊंची जाति एवं अति पिछड़ी जातियों को इस बात का कहीं न कहीं मलाल है कि राजनीतिक निर्णय की प्रक्रिया में उचित भागीदारी से यह वंचित हैं। प्रो. सिन्हा ने आगे कहा कि डॉ. श्री कृष्ण सिंह राजनैतिक चेतना फ्रंट बिहार की राजनीति में, प्रदेश के राजनीतिक निर्णय की प्रक्रिया में तथा राजनीतिक सत्ता में अपनी हिस्सेदारी के सवाल पर सतत संघर्षरत और प्रयासरत रहेगा जब तक इसका वाजिब हक हकूक हासिल ना हो जाए ।
सभा को सत्यजीत कुमार सिंह, प्रो. रामविलास सिंह शेखपुरा, राम नरेश शर्मा नवादा, रामबरन शर्मा लक्खीसराय, नरेंद्र कुमार शर्मा बक्सर, मुक्तेश्वर उपाध्याय आरा, कृष्णकांत शर्मा, धर्मेंद्र कुमार सिंह औरंगाबाद, मनोज कुमार सिंह अरवल, जितेंद्र शर्मा जहानाबाद, धीरेंद्र कुमार गया, पंकज कुमार राय कैमूर, अजीत कुमार सिंह पटना आदि ने भी संबोधित किया।

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