अरूण जेटली द्वारा बिहार विधान सभा चुनाव (2015) के लिये जारी भाजपा का विजन डाॅक्यूमेन्ट को मुख्यमंत्री के सात निश्चय कार्यक्रम में शामिल करने की भाजपा नेतृत्व से अपील

पटना, 23 सितम्बर, 2017
केन्द्रीय वित्त मंत्री श्री अरूण जेटली ने 2015 बिहार विधान सभा चुनाव के अवसर पर भाजपा का विजन डाॅक्यूमेन्ट जारी किया था। वायदों को बिहार के मुख्यमंत्री द्वारा घोषित सात निश्चय कार्यक्रम में पा्रथमिकता के साथ भाजपा नेतृत्व से लागू करने की अपील करते हुए पूर्व मंख्यमंत्री एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री, डा॰ जगन्नाथ मिश्र ने कहा है कि विजन डाॅक्यूमेन्ट में बिहार के विकास की चुनौती का उल्लेख करते हुए कहा गया था कि यहाँ गरीबी बेहद और लगातार बनी हुई है। किन्तु पिछले 25 वर्षों में पाटने का प्रयास नहीं किया गया है जबकि बिहार की जनता, समाज के सभ्रान्त लोग, व्यापारी वर्ग, सरकारी अधिकारी, किसान और राजनीतिक सभी शामिल होकर इस स्थिति में बदलाव चाहते हैं और सभी बिहार की छवि दुरूस्त करना चाहते हैं। आवश्यकता इस बात की है कि इस तरह की स्थिति में अब नई पुनर्गठित एनडीए की सरकार बदलाव लाये और श्री नीतीश कुमार के द्वारा घोषित सात निश्चय कार्यक्रम के साथ प्राथमिकता देकर निदान ढूंढे जायं तथा ऐसी रणनीति बनायी जाय जो बिहार की विकास के चुनौतियों का सामना करने में सहायक बने। इस डाॅक्यूमेन्ट में बताया गया था कि राज्य के विकास कार्यक्रमों का संचालन राष्ट्रीय गति से बहुत पीछे है और यही प्रमुख कारण है कि राज्यों के बीच इसकी आमदनी में लगातार कमी आती गयी है। विजन डाॅक्यूमेन्ट में बताया गया था कि बिहार की लगभग 40 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा के नीचे है, जो भारत में सबसे अधिक है। निजी परियोजनाओं के तहत बिहार की भूमिका प्रमुख राज्यों के बीच न्यूनतम रही है। सरकार जो राशि खर्च करती है उसका लाभ गरीबों को शिक्षा के क्षेत्र में स्वास्थ्य के क्षेत्र में नहीं मिलती है। भले ही बजट में उनका प्रावधान किया गया हो। डाॅक्यूमेन्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि बिहार में कानून व्यवस्था की गंभीर समस्या बनी हुई है। वह सरकार के लिये बड़ी चुनौती है। इसलिये सरकार की विकास नीति में प्राथमिकता देने वाली दो महत्वपूर्ण बातें हैं- बिहार कमजोर आधारभूत संरचना मजबूत करना तथा कानून व्यवस्था में सुधारना। साथ ही विनिवेश दर के बढ़ने के लिये वातावरण सुदृढ़ बनाने के लिये सुधार लाना होगा। इस दिशा में लम्बे अर्से चली आ रही समस्या को सुधारना होगा। विनिवेश के लिये नई एनडीए सरकार को गंभीरता से विचार करना होगा। विजन डाॅक्यूमेन्ट में स्पष्ट है कि बिहार में विनिवेश के वातावरण सुधार होगा। दूसरी हमारी प्रशासन प्रक्रिया में सुधार होगा। तीसरा महत्वपूर्ण सामाजिक सेवाओं की सुदृढ़ रूप रेखा बने और उनका कार्यान्वयन हो। चैथा बजट और वित्तीय सुधार हो और सबसे महत्वपूर्ण विधि व्यवस्था में सुधार आवे।
डा॰ मिश्र ने कहा कि नई एनडीए सरकार 2005-10 वाली सरकार नहीं है। वह दोनों सरकारें भाजपा-जद (यू॰) गठबंधन से चुनाव लड़ी गई थी और श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में भाजपा ने चुनाव में ही स्वीकार कर लिया था। इसलिये सरकार की निर्णय श्री नीतीश कुमार की हुआ करती थी। इस सरकार में श्री सुशील कुमार मोदी की अहमियत बढ़ी है। अब नई एनडीए सरकार में भाजपा को अपनी रणनीति बदलनी होगी और अपना अस्तित्व को बनाये रखना होगा। यह भी विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि 2013 भाजपा-जद (यू॰) गठबंधन टूटने से स्थिति गंभीर हो गई। वह पुनः श्री नीतीश कुमार को ही गठबंधन चेहरा के रूप में स्थापित किया गया। महागठबंधन में भ्रष्टाचार का बढ़ावा लगातार जारी था, जबकि भ्रष्टाचार मुक्त शासन श्री कुमार का मुख्य पूंजी रहा है। उसी पूंजी पर लगातार आघात होने के कारण जो प्रशासनिक विषमता उपस्थित हो रही थी उसी के अनुरूप अपनी छवि बचाने के लिए श्री कुमार ने एनडीए गठबंधन की सरकार बनाई। भाजपा के अलग होने के कारण श्री कुमार को बड़ी कीमत चुकानी पड़ी। फिर से अपनी पहचान लाने के लिए भाजपा के साथ आने का निर्णय अब इस नये एनडीए गठबंधन में शामिल होने से सरकार कुशलता के साथ सुशासन बिहार में फिर से स्थापित होने की संभावना हो रही है। बिहार की नई सरकार को भाजपा के घोषणा पत्र के वादे को पूरा करने का दायित्व है। अगर ऐसा नहीं होगा तो चुनाव में एनडीए गठबंधन को कठिनाई हो सकती है। श्री कुमार को अपने सुशासन वाली छवि पुनः स्थापित करना होगा। राजनीतिक विकास समन्वय तभी संभव होगा, जब मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार सात निश्चय के साथ-साथ भाजपा विजन डाॅक्यूमेंट में जो वादे किये गये हैं उसका सक्रियता से कार्यान्वित करेंगे। बिहार के एनडीए के नये गठबंधन से ही उत्तर भारत में भाजपा की ताकत बढ़ेगी।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *