खुद की ब्रांडिंग और अपना चेहरा चमकाने में लगे नीतीश कुमार

नयी दिल्ली | खुद की ब्रांडिंग और अपना चेहरा चमकाने में लगे नीतीश कुमार के चलते ही जदयू की यह हालात हुई है। बारह साल के अपने मुख्यमंत्री के कार्यकाल में बारह दिन भी बिहार से बाहर पार्टी के विस्तार के लिए समय नहीं देने वाले नीतीश कुमार किस मुँह से यह कह गए कि पहले के अध्यक्ष ने पार्टी के विस्तार के लिए कुछ नहीं किया। दरअसल नीतीश कुमार शुरू से ही पार्टी के कामकाज में हस्तक्षेप कर-करके पार्टी को बीजेपी की बी टीम बना देने का प्रयास किया। नीतीश कुमार पर उपरोक्त आरोप लगाया है जनता दल यूनाइटेड के संस्थापक राष्ट्रीय महासचिव अरुण कुमार श्रीवास्तव ने। उन्होने कहा कि जदयू की दिल्ली इकाई के कार्यकर्ता सम्मेलन में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने संगठन के विस्तार के संबंध में अपने पूर्ववर्ती पर जो आरोप लगाया है, वह सरासर गलत और सफेद झूठ के अलावा और कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार की शुरू से ही आदत रही है कि वे दूसरों की लगाई बीज से उत्पन्न फसल को काट कर अपने नाम कर लेते हैं।
श्री श्रीवास्तव ने बताया कि मैं पिछले 40 साल से नीतीश कुमार को जानता हूँ। वे मेरे मित्र रहे हैं। हमलोग एकसाथ संगठन में काम कर चुके हैं। दूसरों द्वारा खड़ी की गयी सम्पति (संगठन) को अपने नाम से जोड़ने में उन्हें महारत हासिल है। चाहे वह नब्बे के दशक में बिहार के एक नेता सतीश कुमार द्वारा “कुर्मी चेतना महारैली” आयोजित कर अपने मंच से नीतीश कुमार को भाषण के लिए आमंत्रित करने का रहा हो या फिर शरद यादव द्वारा नीतीश कुमार को नेता बनाने का। हर समय नीतीश दूसरों के कंधे की सवारी कर-करके ही यहाँ तक पहुँचे हैं। मालूम हो कि कुर्मी चेतना महारैली के बाद से ही नीतीश बिहार में कुर्मियों के बड़े नेता बन कर उभरे। श्री श्रीवास्तव ने कहा कि पार्टी का विस्तार कार्यकर्ताओं के बढे मनोबल से ही होता है।
कार्यकर्ताओं का मनोबल बढाने के लिए एवं उन्हें प्रशिक्षित करने के लिए पार्टी समय-समय पर कार्यक्रम आयोजित करती रहती है। चुनावों में बढ-चढ़ कर भाग लेती है, अपने उम्मीदवार उतारती है। फिर संगठन का विस्तार होते रहता है। लेकिन माननीय नीतीश कुमार को इससे कोई वास्ता नहीं रहा। बारह साल में बारह मिनट के लिए भी वे दिल्ली कार्यालय में नहीं आए। सात जंतर मंतर अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष का चेहरा भी अबतक नहीं देख सका है। श्री श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि दिल्ली के पिछले नगर निकाय चुनाव के समय भी नीतीश कुमार ने जदयू को क्षति पहुंचाने का काम किया। उन्होंने बताया कि उक्त चुनाव के समय हमलोगों की योजना नगर निगम की सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की थी। उसी योजना के तहत हमने 20 लोगों को विभिन्न क्षेत्रों से नामांकन के लिए पार्टी का सिंबल दे दिया था। शेष लोगों को सिंबल देने की प्रक्रिया अभी चल रही थी कि नीतीश कुमार के दो दूत आरसीपी सिंह और श्याम रजक अवतरित हुए और बताया कि नीतीश कुमार की इच्छा है कि भाजपा से बातचीत करके दस-बारह सीट पर चुनाव लड़ लिया जाए। यानी जहाँ-जहाँ बीजेपी को सूट करे, वहाँ-वहाँ जदयू चुनाव लड़े। उन दोनों नेताओं ने हमें कहा कि नीतीश कुमार और वित्त मंत्री अरूण जेटली के बीच इस बारे में बातचीत हो गयी है।
उन्होंने बताया कि नीतीश ने शरद यादव से भी इस मुत्तलीक बातचीत की थी। शरद जी ने जब नीतीश कुमार को बताया कि अरूण श्रीवास्तव इसे देख रहे हैं, तब नीतीश ने हमें फोन करके अपनी इच्छा प्रकट की। हमने उन्हें भी बताया कि 20 लोगों को तो सिंबल दिया जा चुका है। शेष लोगों को भी देने की तैयारी पूरी हो चुकी है। परन्तु उनके दबाव के नाते हमें सिंबल देने का काम बंद करना पड़ा। जिसके नाते श्री शरद यादव के घर पर व पार्टी कार्यालय में तोड़फोड़ का सामना भी करना पड़ा। अंतिम समय तक भाजपा की ओर से कोई प्रस्ताव नहीं आया। तब इतने दबाव और हॉच-पॉच के बाद मात्र 40 लोगों को ही सिंबल दिया जा सका। जिसमें दो जीते और कुछ क्षेत्रों में दूसरे स्थान पर रहे। ऐसी हालत तब हुई जब भारी उहा-पोह में हमारे लोग चुनाव लड़े। श्री नीतीश कुमार के आश्वासन के बावजूद एक दिन का भी समय नहीं दिया। केवल श्री शरद यादव ने दो दिन और श्री केसी त्यागी ने एक दिन प्रचार किया। जबकि श्री त्यागी दिल्ली प्रदेश के प्रभारी थे। जो हमारे दो लोग चुनाव जीते उन दोनों जगहों पर शरद यादव ने जरुर प्रचार किया था।
फिर भी जमीन लगभग 40 हजार वोट मिले। हाल ही में संपन्न हुए नगर निकाय चुनाव में नीतीश कुमार ने कुल 102 लोगों को चुनाव लड़ा़या, बिहार से 112 नेता जिसमें नीतीश कुमार भी शामिल थे, प्रचार के लिए आए और जी-जान लगाया। तब भी एक सीट जितना छोड़ कहीं जमानत भी नहीं बचाए और कुल 42000 वोट मिले। श्री श्रीवास्तव ने बताया कि 2012 के उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव के समय नीतीश के सिपहसालार बने आरसीपी सिंह के कहने पर ही तमाम लोगों को सिंबल दिया गया था। खुद नीतीश कुमार बिहार से सटे यूपी के क्षेत्रों में सघन चुनाव प्रचार किया। नीतीश के मंत्री क्षेत्रों में कैम्प किए रहे। बावजूद चुनाव जीतना तो दूर किसी भी सीट पर जमानत नहीं बचा सकी थी। और इस साल के चुनाव में तो एक भी सीट से चुनाव नहीं लड़ कर नीतीश ने तो बीजेपी को वॉक-ऑवर ही दे दिया। उन्होंने कहा कि जदयू गुजरात में पचास से अधिक सीट पर चुनाव लड़ रही है। यह कैसा चुनाव है जिसमें न तो पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष और न ही दूसरा कोई नेता प्रचार के लिए वहाँ नहीं गया। केवल एक दिन केसी त्यागी गुजरात गए और प्रेस कॉन्फ्रेस कर लौट आए। उन्होंने सवाल किया कि क्या चुनाव में केवल प्रेस कॉन्फ्रेस करके ही चुनाव जीता जा सकता है।
उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार और उनके लोगों की यही परिभाषा है तब तो प्रधानमंत्री सहित अन्य सारे नेता बेवजह पसीना बहा रहे हैं। श्री श्रीवास्तव ने बताया कि शरद गुट के गुजरात के कद्दावर नेता छोटु भाई बसावा के विधान सभा क्षेत्र झगडिया में नीतीश कुमार ने छोटु भाई बसावा के हम नाम एक व्यक्ति को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। दरअसल हमनाम उस व्यक्ति को बीजेपी ने बसावा के खिलाफ डम्मी उम्मीदवार के रुप में खड़ा करने के लिए ढूंढा था, जिसे बीजेपी के कहने पर नीतीश ने अपना उम्मीदवार बना डाला। नीतीश के उक्त उम्मीदवार ने स्वयं यह बात कहा है। श्री श्रीवास्तव ने बताया कि नीतीश कुमार ने बीजेपी के कहने पर वहीं वहीं उम्मीदवार दिया जहाँ-जहाँ जदयू के उम्मीदवार से बीजेपी को फायदा पहुँचे या फिर वहाँ दिया जहाँ शरद गुट के लोग चुनाव लड़ रहे हैं। यह सब बीजेपी को लाभ पहुंचाने की चाल है। लेकिन नीतीश की यह चाल गुजरात में सफल होने वाली नहीं है।

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