पहली अप्रैल से पूरे देश में ई-वे बिल अनिवार्य-उपमुख्यमंत्री

 

पटना 10.03.2018

नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में शनिवार को आयोजित जीएसटी कौंसिल की 26 वीं बैठक में 50 हजार से अधिक मूल्य के अन्तर राज्य माल परिवहन के लिए पहली अप्रैल से ई-वे बिल की व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया गया। उपमुख्यमत्री सह वित्तमंत्री सुशील कुमार मोदी ने बताया कि अन्तर राज्य सफलता के बाद राज्य के अंदर भी इस व्यवस्था को चरणवद्ध तरीके से लागू की जायेगी।
इसके अलावा कौंसिल ने पहली जुलाई से टीडीएस (Tax Deducted At Source ) लागू करने पर अपनी सहमति दी तथा कम्पोजिशन डीलर द्वारा माल की खरीददारी पर रिवर्स चार्ज को फिलहाल 30 जून तक स्थगित रखते हुए इसके लिए एक मंत्री समूह का गठन किया है जिसकी अनुशंसा पर इसे लागू करने पर विचार किया जायेगा। वहीं, विवरणी का स्वरूप तय करने की जिम्मेवारी जीएसटीएन मंत्री समूह के अध्यक्ष सुशील कुमार मोदी को दी गई जिनकी अनुशंसा के बाद उसे लागू करने पर कौंसिल विचार करेगी।
श्री मोदी ने बताया कि पूर्व में 1 फरवरी से ई-वे बिल की व्यवस्था लागू की गई थी मगर सर्वर में आई तकनीकी गड़बड़ी की वजह से अब पूरे देश में इसे पहली अप्रैल सेे लागू की जा रही है। जीएसटीएन सर्वर से पहली अप्रैल से 50 से 75 लाख तक ई-वे बिल प्रतिदिन जेनरेट होगा।
निबंधित कारोबारी और ट्रांसपोटर्स को अब कागज के फार्म भरने की झंझट नहीं रहेगी बल्कि वे कम्प्यूटर के अलावा मोबाइल एप्पलिकेषंस के जरिए भी आसानी से ई-वे बिल जेनरेट कर सकेंगे। राज्य के अंदर ई-वे बिल की व्यवस्था लागू होने के बाद भी 10 किमी की दूरी तक 2 लाख तक मूल्य के माल के परिवहन तथा पेट्रोलियम उत्पाद जो जीएसटी से बहार है के परिवहन के लिए ई वे बिल की जरूरत नहीं होगी।
पहली अप्रैल से अन्तर राज्य माल परिवहन के लिए ई-वे बिल की व्यवस्था लागू होने से कर वंचना पर कारगर लगाम लगेगी। जीएसटी लागू होने के बाद पहली जुलाई से पूरे देष में चेकपोस्ट की व्यवस्था समाप्त कर दी गई थी जिसके कारण बड़ी मात्रा में बगैर कर प्रतिवेदित मालों की आवाजाही से राज्यों को राजस्व का नुकसान हो रहा था।

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