श्री रजक नें कहा कि विगत समय में आरक्षण के प्रति न्यायपालिका, कार्यपालिका व विधायिका के माध्यम से लगातार प्रहार किया जा रहा है, इससे दलित वर्ग आरक्षण के प्रति आशंकित होते रहता है और यह स्वाभाविक भी है।“आरक्षण को कोई ख़त्म नहीं कर सकता” आरक्षण के बारे में माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के इस वक्तव्य से दलित वर्ग में उत्साह का संचार हुआ है। क्योंकि माननीय श्री नीतीश कुमार एक सशक्त विचारधारा वाले राजनेता के रूप में जानें जाते हैं साथ ही साथ दलितों के हितैषी भी हैं।
श्री रजक नें कहा माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार से आग्रह किया  कि वे प्रोन्नति में आरक्षण का बिल जो संसद में लंबित है, उसे अपनें प्रभाव का इस्तेमाल कर लागू करानें की कृपा करेंगे। साथ ही विगत समय में प्रतिभाशाली दलित वर्ग के युवाओं की सामान्य कोटि के कटऑफ मार्क्स लानें पर भी अरक्षित वर्ग में रखे जानें का जो प्रावधान किया गया है यह दलित छात्रों के साथ अन्याय है। उनके मेधा पर प्रहार कर उन्हें आरक्षित वर्ग में ही सीमित कर दिया गया है। मेधावी एवं प्रतिभावान युवा भी आरक्षित कोटे में सम्मिलित होने से हतोत्साहित हो गए हैं। जिसकी आबादी ज्यादा है उन्हें आरक्षण के प्रतिशत को सीमा में बांध दिया गया है। यह एक प्रकार की साजिश है, क्यूंकि स्वर्ण वर्ग, जिनकी आबादी कम होने के पश्चात भी उन्हें 50.5% हिस्सेदारी मिल गयी है। यह अन्याय नहीं तो क्या है?
क्योंकि संविधान के मुताबिक रिज़र्व कैटोगेरी और ओपेन कैटोगेरी होता है, तो ओपेन कैटोगेरी में तो सभी को आना चाहिए। पर चतुर लोगों के द्वारा परिभाषा को अपने अनुसार परिभाषित कर आरक्षित वर्ग को मेधा के अधिकार से वंचित किया जा रहा है।
श्री रजक नें कहा कि जिसप्रकार सरकारी,रेलवे एवं बैंकिंग क्षेत्र में नौकरियों की संख्या लगातार घटाई जा रही है। इससे स्पष्ट है की आने वाले दिनों में सरकारी क्षेत्रों में नौकरियां सीमित हो जायेगी सबकुछ निजी क्षेत्रों में चला जायेगा। ऐसे में हमारी निजी क्षेत्र में आरक्षण की मांग माना जाना आवश्यक है। अन्यथा भविष्य में आज़ादी के बाद दलितों के विकास को जो कुछ गति प्राप्त हुई थी उसमें ठहराव आ जायेगा।श्री रजक नें कहा कि माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार निजी क्षेत्रों एवं सरकारी कार्यों के ठेकेदारी में आरक्षण के पक्षधर रहे हैं, परन्तु इसके क्रियान्वयन के लिए भी माननीय मुख्यमंत्री द्वारा प्रयास होने चाहिए। आपके द्वारा बिहार में निचले स्तर की न्यायपालिका में आरक्षण लागु कर ऐतिहासिक कार्य किया गया है। परन्तु अब इसे उच्च न्यायपालिका में भी लागु करानें हेतु दलित वर्ग आपसे अपेक्षा रखता है। केंद्र सरकार के एक महत्वपूर्ण सहभागी होनें के कारण आपकी बात सुनी भी जाएगी।इधर देश स्तर पर दलितों के साथ हो रहे अत्याचारों के प्रति आप सतत चिंतित रहते हैं। परन्तु इसमें कमी आये इसके लिए आपके द्वारा उपयुक्त पहल की आवश्यकता है।श्री रजक नें कहा कि आज माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनुसूचित जाति/ जनजाति पर अत्याचार के मामलों में तत्काल FIR एवं तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगाये जानें से दलितों पर अत्याचार के मामले बढ़ सकते हैं। और अत्याचारियों का हौसला बढ़ जायेगा।हम दलितों का माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार पर विश्वास है। हमारा आग्रह होगा कि उपरोक्त बिंदुओं को गंभीरता से निराकरण हेतु वे पहल करेंगे। हमें उम्मीद है कि निश्चित उनके प्रयासों से सफलता मिलेगी।

 

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