षिवकुण्ड की जमीन कब्जा करने, दिलाने की लगी होड

अजय कुमार पाण्डेय
औरंगाबाद – मामला है नबीनगर प्रखण्ड अंर्तगत् महुआॅंव पंचायत् का। ऐसे तो यह भूमि सरकारी रिकाॅंर्ड में भी षिवकुण्ड के नाम पर ही दर्ज है जिसका खाता नंबर – 171, प्लाॅंट नंबर – 178, कुल रकवा – 2 एकड़ 49 डिसमील बतायी जाती है। लेकिन ताजूब की बात है कि गाॅंव के ही कुछ दबंग कब्जाधारियों ने पूर्व में अवैध कब्जा जमाते हुए खेती करते रहे। अवैध कब्जा से संबंधित मुद्वे पर धिरे – धिरे जब ग्रामीण जनता आवाज उठाना षुरू किए तो़ विवाद् भी बढ़ने लगा। इसी मुद्वे को लेकर जब ग्रामीणों ने एकजूट होते हुए षिवकुण्ड जमीन की नियमानुकुल सरकारी अमीन से उचित् नापी कराकर सिमांकन कराने हेतू अंचलाधिकारी के नाम से एक लिखित आवेदन तैयार कर भूतपूर्व मुखिया जनेष्वर यादव के पास मिले थे तो मुखिया ने भी दिनांक – 07/ 05 / 2005 को अपनी ओर से अनुषंसा करते हुए लिखा था कि ग्रामीणों का कथन सत्य है। सरकारी अमीन द्वारा नापी कराया जाए। इसके बाद ग्रामीणों से जब संवाददाता की मुलाकात हुयी तो भेंटवार्ता के दौरान जानकारी देते हुए बताया कि मुखिया जी के अनुषंसा पष्चात् सरकारी अमीन भारती जी द्वारा षिवकुण्ड जमीन की नापी भी की गयी थी। लेकिन आज – तक सिमांकन नही कराया गया। इसके बाद लगभग 2009 – 2010 में जब औरंगाबाद के जिला षिक्षा पदाधिकारी अवधेष कुमार सिंह यहाॅं कार्यरत् थे तो उसी वक्त उच्च विधालय बनने को लेकर महुआॅंव पंचायत् एवम् कंकेर पंचायत् दो गाॅंवों के बीच विवाद चल रहा था। तब जिला षिक्षा पदाधिकारी से मिलकर जब संवाद्दाता ने पूछा था कि क्या षिवकुण्ड के जमीन पर महुआॅंव में उच्च विधालय का निर्माण किया जा सकता है? तो कहा कि जब तक षिवकुण्ड की जमीन को राज्यपाल महोदय विधालय के नाम पर कनवर्ट नही करते तब – तक संभव नही?यह अधिकार मात्र राज्यपाल महोदय को ही प्राप्त है।जब पूछा कि सरकारी नियमानुकुल उच्च विधालय निर्माण के लिए कम से कम कितना भूमि होना चाहिए तो कहा कि डेढ़ एकड़। दूरी के मुद्वे पर पूछे जाने पर कहा कि अगल – बगल चल रहे नियमित सरकारी उच्च विधालयकम से कम पाॅंच कि0 मी0 की होनी चाहिए। इस हिसाब से देखा जाए तो उच्च विधालय निर्माण करने के लिए तो भूमि पर्याप्त मौजूद थी। दूरी का कैटेरिया भी पूरा हो रहा था।लेकिन दोनों गाॅंवों में उच्च विधालय निर्माण को लेकर हो रही लडा़ई के बीच वोट बैंक की राजनिति करते हुए आमजनों में चर्चा अनुसार एक राजनितिज्ञ के ईषारे पर तर्क दिया गया था कि महुआॅंव पंचायत् के अंदर माधे – षिवनपुर जनता उच्च विधालय अंकोरहा मौजूद है। इसलिए उच्च विधालय का निर्माण कंकेर पंचायत् में ही किया जाए। लेकिन वास्तव में देखा जाए तो अंकोरहा में जो उच्च विधालय मौजूद है। उससे महुआॅंव पंचायत् की लगभग दूरी 5 कि0 मी0 पड़ती है। केवल महुआॅंव पंचायत् के अंदर पड़ने वाली माधे – षिवनपुर दो गाॅंवों का विधालय नामकरण के वक्त नाम षामिल हो जाने कीवजह से यहाॅं का विधालय काटकर कंकेर पंचायत् में कर दिया गया। इसी जमीन से संबंधित जब एक बार संवाद्दाता ने नबीनगर पंखण्ड विकास पदाधिकारी से महुआॅंव पंचायत् भवन में हो रही सार्वजनिक ग्राम सभा बैठक के दौरान लगभग 2016 के अंत् में उस वक्त मौजूद मुखिया रीना देवी, मौजूद पंचायत् के तमाम् वार्ड सदस्य, ग्रामीणों की मौजूदगी में ही सवाल पूछा था कि क्या षिवकुण्ड की जमीन पर सरकारी उच्च विधालय का निर्माण किया जा सकता है तो जवाब देते हुए कहा था कि क्यों नही? आप ग्रामीण जनता से आवेदन दिलवाईए मैं सीं0 ओ0 साहब को बोलता हूॅं। इसी मिटिंग में मौजूद कब्जाधारी सुनील त्रिपाठी ने कहा था कि हमलोग चाहते हैं कि इस जमीन पर षिवकुण्डका निर्माण नही हो नही तो गंदा होगा। तब संवाददाता ने कहा था कि षिवकुण्ड के बजाए उच्च विधालय निर्माण या सरकारी अस्पताल तो बनाया जा सकता है? क्योंकि बारून – नबीनगर के बीच लगभग दूरी 42 – 43 कि0 मी0 है। इसके बावजूद भी कोई सरकारी अस्पताल मौजूद नही है तो प्रखण्ड विकास पदाधिकारी ने भी सम्र्थन किया था। हालांकि अंचलाधिकारी महोदय सभा समाप्ति के बाद पहुॅंचे थे। इस सभा में मौजूद मुखिया भी पूर्व मुखिया की बहु ही थी और पुत्र ज्वाला यादव भी मौजूद थे। इसके बाद इसी भूमि को राजनितिक साजिष के तहत् कुछ कब्जाधारियों ने न जाने कितना पैसा लेकर कुछ दिन पूर्व पैक्स गोदाम बनवाने का निंव रखवा दी।यह मैं नही बता सकता क्योंकि ग्रामीणों का ही कहना है कि तीन कब्जाधारीयों ने महुआॅंव पंचायत् के पैक्स अध्यक्षसे पैसा लेकर ऐसा गेम खेला है। अब ऐसी परिस्थिति में भी सवाल उठना लाजिमी होता है कि जिला षिक्षा पदाधिकारी के ब्यानानुसार बिना राज्यपाल महोदय द्वारा षिवकुण्ड जमीन को कनवर्ट किए हुए किसी भी दूसरी परियोजना बनाई ही नही जा सकती तो पैक्स गोदाम बनवाने का अधिकार किसने दे दिया? हाल ही में लगभग एक माह से दूसरा लोकल राजनितिज्ञ गेम खेलते हुएइसी षिवकुण्ड भूमि पर अचानक पहले तो नाला की तरह षिवकुण्ड के नाम पर जमीन की खुदाई जे0सी0बी0 बुलाकर करवाने लगे। धिरे – धिरे इसी नाले खुदाई को ही वर्तमान अवस्था में एक मौत का कुआॅं का रूपलोकल राजनितिज्ञ द्वारा दे दिया गया है। जो खूल्लेयाम देखा जा सकता है। जब षिवकुण्ड के नाम पर खुदाई प्रारंभ हुआ तो ग्रामीण अनुसार कब्जाधारियों के परिजन से राजनितिज्ञ, ग्रामीणों के साथ विवाद् भी उत्पन हो गया था।यदि आमजनों में हो रही चर्चा को सत्य माना जाए तो महुआॅंव पंचायत् के मुखिया वृजमोहन सिंह भी कहते फिर रहे हैं कि यहाॅं के कोई भी लोग्र षिवकुण्ड की किसी भी प्रकार से खुदाई करवाए। इसके बाद मैं इसके नाम पर सरकारी पैसा का फण्ड तो भॅंजा ही लेंगे। यहाॅं पर भी सवालिया निषान उठता है कि क्या इसी प्रकार सार्वजनिक सरकारी भूमि का कुछ मनबढु़ लोग बेफिक्र होकर मनमानी कार्य करते रहेंगे या फिर जिला – प्रषासन द्वारा उचित निर्णय लेते हुए लगाम भी लगायी जाएगी? विगत् बुधवार यानि दिनांक -09 मई 2018 को जब भूतपूर्व मुखिया जनेष्वर यादव से ससना गाॅंव में ही मेन रोड पर मुलाकात हुयी तो चर्चा करते हुए कहा कि षिवकुण्ड का जितना सरकारी जमीन महुआॅंव पंचायत् में मौजूद है उतना में तो एक मिनी ब्लाॅंक बनाया जा सकता है या सरकारी अस्पताल भी बनाया जा सकता है। जो कल्याणकारी कार्य होगा।जिला – प्रषासन को इस मामले को गंभीरता से अवष्य लेना चाहिए।ग्रामीण जनता ने ही संवाददाता को भेंटवार्ता के दौरान जानकारी देते हुए कहा कि षिवकुण्ड निर्माण के नाम पर कराई जा रही खुदायी की मिटी भी कुछ लोगों ने एन0 पी0 जी0 सी0 परियोजना में बेचकर पैसा कमाए हैं जो सरासर अन्याय है। अब यहाॅं पर भी सवालिया निषान उठता है कि नियमानुकुल जब सरकारी मंजूरी प्राप्त नही हुआ तो षिवकुण्ड निर्माण के नाम पर भी सरकारी भूमि का खुदाई कौन करवा रहा है? इसकी भी निष्पक्ष जाॅंच कर जिला – प्रषासन को उचित कार्रवायी करनी चाहिए। यदि ग्रामीणों की बात पर भरोसा की जाए तो जब षिवकुण्ड खुदाई का कार्य करते कुछ ही दिन हुआ था तो सदर अनुमंडल पदाधिकारी डाॅं0 सुरेन्द्र प्रसाद ने भी मौके पर मौजूद लोगों को हिदायत् देते हुए रोक लगवा दी थी। इसके बावजूद भी यह खेल निरंतर जारी है जो काफी चिंता का विषय है। इसी प्रकार विभिन्न प्रकार का गेम खेलते हुए इसी भूमि पर नाजायज खेल हमेंषा खेला जा रहा है जिस पर प्रषासन को त्वरित कार्रवायी करनी चाहिए। नही तो आगामी दिनों में भयंकर परिणाम भी देखने को मिल सकते हैं।

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