पटना, 18 मई 2018
‘‘अपने देश में भारतीय संविधान, न्यायपालिका और सेना को काफी सम्मान की निगाह से देखा जाता है। आम जनता भी न्यायपालिका को इतनी श्रद्धा और आदर के साथ देखती है कि उसका हर फैसला ईश्वरीय निर्णय की तरह देखा जाता है।’’-उक्त उद््गार, महामहिम राज्यपाल श्री सत्य पाल मलिक ने स्थानीय बापू सभागार में एडवोकेट एसोसिएशन के शताब्दी समारोह में अपने संबोधन के दौरान व्यक्त किये।
राज्यपाल ने कहा कि सस्ता, सुगम और त्वरित न्याय उपलब्ध कराने में अधिवक्ताओं को अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज की अंतिम कतार में खड़े गरीब और लाचार आदमी को न्यायिक सुविधाओं को सुलभ कराना अधिवक्ताओं की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि एक अभिवंचित वर्ग के सदस्य को जब आप न्याय दिलाने में सफल होते हैं तो आपको काफी खुशी और शांति मिलती है। उन्होंने कहा कि कमजोर वर्गों के प्रति पूरी संवेदना के साथ न्याय उपलब्ध कराना समय की सबसे बड़ी माँग है।
राज्यपाल ने कहा कि पटना हाईकोर्ट के एडवोकेट एसोसिएशन का अत्यन्त गौरवपूर्ण इतिहास रहा है। देशरत्न डाॅ॰ राजेन्द्र प्रसाद इससे जुड़े रहे हैं। उन्होंने कहा कि आदरणीय राजेन्द्र बाबू का सम्पूर्ण जीवन त्याग, सादगी, ईमानदारी और सत्यनिष्ठा का ज्वलंत उदाहरण रहा है। राज्यपाल ने कहा कि राजेन्द्र बाबू सहित कई महान न्यायविदों की सुदीर्घ परम्परा इस संस्था से जुड़ी हुई है। राज्यपाल ने युवा अधिवक्ताओं से अनुरोध किया कि न्यायपालिका की मर्यादा, गरिमा और इसके प्रति आमजनों की श्रद्धा को बरकरार रखने के लिए हरसंभव प्रयास किया जाना चाहिऐ।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केन्द्रीय विधि एवं न्याय मंत्री श्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि वकालत पेशे में सम्मान पाने के लिए कठिन परिश्रम, मर्यादा तथा प्रतिबद्धता बहुत जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश जी के नेतृृत्व में सम्पूर्ण क्रांति के दौर में व्यक्ति, प्रेस एवं न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करनेवाले नेता आज सत्ता सँभाल रहे हैं। देश निरंतर प्रगति के पथ पर बढ़ रहा है। केन्द्रीय मंत्री ने अपनी सांसद निधि से विभिन्न अधिवक्ता संगठनों के लिए आर्थिक सहयोग की भी घोषणाएँ की।

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