बिहार को इथनाॅल हब बनाने का सपना होगा साकार

हजारों करोड़ के निवेश प्रस्ताव की मंजूरी से बहुरेंगे दिन बिहार के

पटना. दिनांक: 28.07.2018 केंद्र की सरकार ने गन्ना से सीध्े इथनाॅल बनाने की मंजूरी प्रदान कर बिहार की चिरप्रतिक्षित मांग को मान लिया है. अब बिहार के मुख्यमंत्राी श्री नीतीश कुमार का, बिहार को इथनाॅल बनाने का सपना साकार हो सकेगा. बिहार में इथनाॅल उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं. खासकर गन्ना रस से सीध्े इथनाॅल बनाने की बड़ी संभावनाएं यहां मौजूद है. इसी के मद्देनजर बतौर केंद्रीय कृषि मंत्राी रहते हुए व वर्तमान मंे मुख्यमंत्राी की हैसियत से श्री नीतीश कुमार निरंतर बिहार को इथनाॅल हब बनाने का सपना संजोते रहें. किंतु केंद्र की पूर्ववर्ती यूपीए सरकार, राज्य सरकार के मांग को नजरअंदाज करती रही. 2005 से 2007 के दौरान सूबे के गन्ना उद्योग मंत्राी श्री नीतीश मिश्र के प्रयास एवं माननीय मुख्यमंत्राी श्री नीतीश कुमार के पहल पर कई बार जोर-शोर से केंद्र सरकार के समक्ष गन्ना से सीध्े इथनाॅल बनाने की मांग की जाती रही. किंतु, समय की मांग एवं राज्य की आवश्यकता को नजरअंदाज किया जाता रहा. परिणामस्वरूप राज्य में लगभग 20 हजार करोड़ के निवेश प्रस्ताव अध्र में लटक गए और राज्य के गन्ना किसान एवं चीनी मील की अपेक्षाओं पर विराम लग गया. अंततः देर से ही सही केंद्र की इस एनडीए सरकार का यह कदम स्वागत योग्य है. गौरतलब है कि वर्तमान में भारत कच्चे तेल का 80 प्रतिशत आयात कर रहा है. इस पर बड़े पैमाने पर ध्न खर्च हो रहे हैं. सरकार ने पेट्रोलियम में 10 प्रतिशत इथनाॅल मिलाने की मंजूरी पहले से दे रखी है. किन्तु, 158 करोड़ लीटर इथनाॅल के मांग के विरु( 78.5 करोड़ लीटर इथनाॅल की सप्लाई हो सकी. इसे देखते हुए एवं चीनी मीलों को वितीय संकट से उबारने के लिए सरकार ने गन्ना नियंत्राण आदेश 1966 में संशोध्न करने का पफैसला लेकर अध्सिूचना जारी कर दिया. यह स्वागत योग्य कदम है. जाहिर है इस पफैसले का बिहार की अर्थव्यव्स्था पर क्रांतिकारी प्रभाव पड़ेगा. क्योंकि गन्ना उत्पादन की अपार संभावनाएं रहने के बावजूद राज्य चीनी निगम की सभी मीलें बंद हैं. साथ ही हजारों-करोड़ों के निवेश प्रस्ताव भी अध्र में है. ऐसे में इस पफैसले के बाद बंद चीनी मीलों को खोलने का मार्ग प्रसश्त हो सकता है.

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