हिंदी एक भाषा हीं नहीं राष्ट्र को जोड़ने वाली एक मज़बूत सूत्र है : प्रो तिवारी

१५ दिवसीय ‘पुस्तक चौदस मेला’ के साथ हुआ हिन्दी पखवारा का उद्घाटन

साहित्य-सेवी नृपेंद्र नाथ गुप्त एवं कवि रवि घोष का हुआ अभिनंदन

पुस्तक’निर्भया अभी जीवित है’ का हुआ लोकार्पण

पटना,१ सितम्बर । हिन्दी भारत की राष्ट्रभाषा या राज भाषा हीं नहीं, देश को मज़बूती से जोड़ने वाली एक महान शक्ति है। यह सभी भारतीय भाषाओं को भी जोड़ती है। जब हम हिन्दी की बात करते हैं तो प्रकारांतर से भारत की समस्त भाषाओं की बात करते हैं।
यह बातें आज यहाँ, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में आज से आरंभ हुए, ‘राज-भाषा हिन्दी पखवारा एवं पुस्तक चौदस मेला’ के उद्घाटन के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में अपना व्याख्यान देते हुए,विश्वविद्यालय सेवा आयोग, बिहार के पूर्व अध्यक्ष प्रो शशि शेखर तिवारी ने कही। उन्होंने कहा कि भाषा के स्तर पर भी हिंदी संस्कृत की भाँति अत्यंत प्रांजल और सर्वग्राह्य है।
समारोह का उद्घाटन करते हुए, पटना विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डा एस एन पी सिन्हा ने कहा कि,साहित्य सम्मेलन द्वारा आयोजित इस पुस्तक मेला से साहित्यिक पुस्तकों के प्रति पाठकों का रुझान बढ़ेगा।
सभा की अध्यक्षता करते हुए सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कहा कि, हिंदी भाषा और साहित्य की उन्नति के जिस महान उद्देश्य के साथ आज से लगभग एक सौ वर्ष पूर्व बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन की स्थापना हुई थी, सम्मेलन ने अपने दायित्व का पूरा निर्वहन किया है। अब, यह सही अर्थों में भारत की राज काज की भाषा बने, इसके लिए सम्मेलन राष्ट्र-व्यापी वैचारिक-आंदोलन आरंभ करेगा। अपनी स्थापना के शताब्दी-वर्ष में यह सम्मेलन, भारत सरकार के कामकाज की भाषा के रूप में हिन्दी को प्रतिष्ठित देखना चाहेगा। इस हेतु सभी स्तरों पर सघन कार्यक्रम चलाए जाएँगे।
इसके पूर्व सम्मेलन के उपाध्यक्ष और ‘राष्ट्रभाषा-प्रहरी’के रूप में चर्चित साहित्यकार नृपेंद्र नाथ गुप्त और कवि रवि घोष को,उनके ८५वें जन्म-दिवस पर, अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर श्री घोष की सद्य: प्रकाशित पुस्तक ‘निर्भया अभी जीवित है’ का भी लोकार्पण किया गया।
भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो अमरनाथ सिन्हा, बिहार विधान परिषद के सदस्य एवं पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री डा संजय पासवान,सम्मेलन के उपाध्यक्ष डा कुमार अरुणोदय,डा मधु वर्मा, डा कल्याणी कुसुम सिंह तथा हिन्दी सलाहकार समिति के सदस्य बीरेन्द्र कुमार यादव ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
अतिथियों का स्वागत सम्मेलन के उपाध्यक्ष डा शंकर प्रसाद ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन मृत्युंजय मिश्र ‘करुणेश’ने किया। मंच का संचालन योगेन्द्र प्रसाद मिश्र ने किया।
इस अवसर पर डा विश्वनाथ वर्मा,कवि ओम् प्रकाश पांडेय,अमियनाथ चटर्जी,डा विनय कुमार विष्णुपुरी,डा मेहता नगेंद्र सिंह, राज कुमार प्रेमी, डा सुधा सिन्हा, राज कुमार प्रेमी, कालिन्दी त्रिवेदी, पूनम आनंद, सुनील कुमार दूबे, डा शालिनी पांडेय, सागरिका राय, जय प्रकाश पुजारी, चंदा मिश्र,डा युगल किशोर प्रसाद,पंकज प्रियम समेत बड़ी संख्या में हिन्दी-सेवी और प्रबुद्धजन उपस्थित थे।
पुस्तक-मेला में, बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन के प्रकाशन विभाग, वातायान,अनामिका प्रकाशन,प्रज्ञा प्रकाशन आदि प्रकाशकों ने अपने कक्ष लगाए हैं। पाठकों में साहित्यिक पुस्तकों के प्रति रुझान देखा गया।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

51 − = 46