ब्लैक बंगाल बकरी का नस्ल सुधार इनोवेशन

#किसान_जन_जागरण_यात्रा

पहला दिन ,अरवल जिला और किसान गजेन्द्र सिंह का ब्लैक बंगाल बकरी का नस्ल सुधार इनोवेशन की बाकमाल स्टोरी।

ब्लैक बंगाल बिहार में पाई जाने वाली सबसे पुरानी प्रजाति हैं । आप सबने देखा होगा ईसे गांव-देहात-कस्बो में । मजदूर वर्ग का वर्षों से सहारा रही है ब्लैक बंगाल । ईसके मांस का स्वाद सबसे बेहतरीन होता है बाॅस । लाजवाब। हाॅ साईज काफी छोटा होता हैं ईसका अन्य प्रजाती के बकरीयो के तुलना में। जैसे जमुनापारी बकरी की बात करें तो एक साल में यह ब्लैक बंगाल सें दुगुना तिगुना विकास कर लेता हैं । इसमें मिल्किंग कैपेसिटी भी ज्यादा हैं । हां स्वाद के मामलें में यह ब्लैक बंगाल के तुलना में कही नही ठहरता।
अब अरवल वाले गजेन्द्र बाबू के दिमाग में ख्याल आया की अगर जमुनापारी और ब्लैक बंगाल का क्राॅस कराके एक नया वैरायटी विकसीत कर ली जाये तब तो मजा आ जायेगा। मांस का क्वालिटी के साथ साथ क्वांटिटी भी बढ़ जायेगा । भाई साहब से पहले भी यह आईडिया सैकड़ों वैज्ञानिकों को आया था पर आज तक कोई सफल न हुआ । गजेन्द्र बाबू ने जब अपनी इच्छा बुद्धजीवियों के समक्ष जाहिर की तो सबने उन्हे बाल्टी भर असफलता की कहानी सुनाई।पर पता नही गजेन्द्र जी के दिमाग में क्या चल रहा था ? जमुनापारी से ईन्होने ब्लैक बंगाल का क्राॅस कराया और जैसा होता आया था गर्भधारण के बाद बकरीयाॅ मरती गई । एक,दो तीन करते करते संख्या बाईस तक पहुच गई । दरअसल ब्लैकबंगाल का गर्भ तो छोटा होता हैं ,उसमें लंबे कद के जमुनापारी के बच्चे का पोषण कहा संभव था। लाख माथापच्ची के बाद एकाध बच्चे जो धरती पर अवतरित हुए वो भी ब्लैक बंगाल के कम दूध उत्पादन क्षमता के कारण कुपोषित हो मर गये। गजेन्द्र बाबू परेशान । गांव, समाज यहां तक परिवार भी इनके मानसिक संतुलन जानने के जुगत में लगा रहे। आखिर में ईन्हे एक आयुर्वेदाचार्य मिले दिल्ली वाले । दोनों ने जमकर प्रयास किया और तेईवसी बकरी ने गजेन्द्र बाबू को आदमी बना दिया है।कमाल का संघर्ष रहा हैं जनाब का । ईनके संघर्ष की पुरी दास्तां,ईनकी और आयुर्वेदाचार्य की सारे नुस्खे आपको राष्ट्रीय किसान विकास संघ के द्वारा साल के अंत तक प्रकाशित होने वाली बूक में मिलेगी । फिलहाल एक बात तो स्पष्ट है की ब्लैक बंगाल का नस्ल सुधार हो चुका हैऔर ईसका फार्म स्थापीत कर कोई भी किसान भाई अच्छे से दाल रोटी खा सकते हैं।

Author: Anupam Uphar

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

+ 40 = 50